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परम आनन्द जी नदी किनारे शिला पर पद्मासन में ध्यानमग्न, पीछे वन से ढकी पहाड़ियाँ

स्वमिलन साधना

परिचय

स्वमिलन साधना फाउंडेशन बिना दवा के प्राकृतिक स्वास्थ्य की दिशा में कार्यरत है — चिकित्सकीय आहार, उपवास और संयमित जीवनशैली के माध्यम से।

फाउंडेशन क्या करता है

स्वमिलन साधना फाउंडेशन का काम एक वाक्य में कहा जा सकता है — लोगों को यह सिखाना कि अपने शरीर को कैसे पढ़ें, और आहार तथा दिनचर्या से उसका ध्यान कैसे रखें।

यह न योग केंद्र है, न ध्यान संस्थान। यह एक प्राकृतिक चिकित्सा और चिकित्सकीय आहार का कार्य है, जिसका केंद्रबिंदु सात दिवसीय आवासीय शिविर है — शरीर की भागवत।

शिविर राजस्थान के नगरों में बारी-बारी से आयोजित होते हैं, और वर्ष में एक बार ऋषिकेश के गंगा तट आश्रम में।

सेवा का दूसरा हिस्सा

शिविर के बाहर फाउंडेशन अन्नदान, पौधारोपण और सामुदायिक स्वास्थ्य सत्संग में लगा रहता है। अतिथियों को तुलसी और नीम के पौधे भेंट करना हर आयोजन का हिस्सा है।

अप्रैल २०२६ में अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन, श्री गंगानगर द्वारा परम आनन्द जी को सम्मानित किया गया।

अब तक

एक निरंतर चलती साधना

वर्षों की साधना
40+वर्षों की साधना
शिविर सम्पन्न
250+शिविर सम्पन्न
शिविरार्थी
18,000+शिविरार्थी
व्याधियों पर कार्य
13व्याधियों पर कार्य

प्रदर्शन-संस्करण

परम आनन्द जी वृक्षों के बीच हाथ जोड़े, ऊपर की ओर देखते हुए

संस्थापक

परम आनन्द जी

परम आनन्द जी चार दशकों से यह कह रहे हैं कि अधिकांश रोग शरीर की विफलता नहीं, उसके साथ किए गए व्यवहार का परिणाम हैं — और जो व्यवहार से बना है वह व्यवहार से ही बदल सकता है।

उनका शिविर उपदेश नहीं देता। वह सात दिन तक एक दिनचर्या जीकर दिखाता है, ताकि लौटने के बाद व्यक्ति स्वयं उसे निभा सके। "अपने डॉक्टर स्वयं बनें" उनका सबसे दोहराया गया वाक्य है।

संस्थापक के विषय में
  • भवन के बाहर प्रतिभागियों का सामूहिक चित्र
  • अतिथि का आरती की थाली से स्वागत
  • सम्मान पट्टिका भेंट करते हुए चार व्यक्ति
  • दाल, चावल, सब्ज़ी और रोटी की सात्विक थाली
  • तिलक लगाकर आशीर्वाद देते हुए
  • खुले में पोस्टर लिए हुए समूह

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