
विधि
विधि
बिना दवा के स्वस्थ होने की पद्धति
शरीर • विचार • भाव
साधना के तीन परस्पर जुड़े मार्ग
स्व-चिन्तन, भक्ति और सेवा — शिविर की साधना इन तीनों को दैनिक जीवन में साथ लाती है।
- 01
ज्ञानयोग
स्व-चिन्तन, अध्ययन और आत्मबोध
- 02
भक्तियोग
प्रेम, समर्पण और भजन-साधना
- 03
कर्मयोग
सेवा, समर्पण और कुशल कर्म
- आहार ही औषधि हैजो थाली में है वही सबसे पहले शरीर से बात करता है — दवा उसके बाद आती है।पूरा पढ़ें

- अपने डॉक्टर स्वयं बनेंअपने शरीर को पढ़ना सीखिए — कौन-सा भोजन क्या करता है, यह आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता।पूरा पढ़ें

- चिकित्सकीय आहारक्या खाना है इससे पहले यह तय होता है कि कब और कैसे खाना है।पूरा पढ़ें

- दिनचर्याशरीर लय पर चलता है। लय टूटती है तो सब कुछ टूटता है।पूरा पढ़ें

- उपवासउपवास भूखा रहना नहीं है — यह पाचन तंत्र को छुट्टी देना है।पूरा पढ़ें


विधि
आहार ही औषधि है
शरीर स्वयं को ठीक करना जानता है। हमारा कार्य केवल इतना है कि हम उसमें बाधा डालना बंद करें — और उसे वह दें जिसकी उसे वास्तव में आवश्यकता है।
पूरी विधि पढ़ें“शरीर ही हमारा मंदिर है, इसे समझें और स्वस्थ रखें।”
परम आनन्द जी
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पढ़ने से आगे — सात दिन जी कर देखिए
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