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रोग

थायराइड

Thyroid

थायराइड की स्थिति में दिनचर्या और निद्रा का प्रभाव प्रायः कम आँका जाता है। शिविर इन्हीं पर कार्य करता है।

यह क्यों बनता है

थायराइड को शिविर में एक अलग-थलग रोग की तरह नहीं देखा जाता। इसे उसी एक मूल कारण का एक और लक्षण माना जाता है — पाचन तंत्र पर वर्षों का बोझ, अनियमित दिनचर्या, और ऐसा आहार जिसे शरीर पचा नहीं पाता।

जब तक कारण वहीं बना रहता है, लक्षण किसी न किसी रूप में लौटता रहता है। इसलिए शिविर लक्षण पर नहीं, कारण पर कार्य करता है।

आहार-आधारित पद्धति क्या करती है

सात दिन के शिविर में पाचन तंत्र को विश्राम दिया जाता है — रस आहार, उपवास और सात्विक भोजन के क्रम से। नियमित निद्रा, प्राणायाम और संतुलित आहार। जाँच और दवा चिकित्सक की देखरेख में ही चलती रहे।

साथ में प्राणायाम, नियमित निद्रा और एक निश्चित दिनचर्या। लौटते समय हर शिविरार्थी अपने साथ एक व्यक्तिगत आहार चार्ट ले जाता है।

आहार के मूल नियम

  • नियमित निद्रा
  • प्रतिदिन प्राणायाम
  • संतुलित आहार
  • नियमित जाँच
  • दवा चिकित्सक की देखरेख में

अनुभव

थायराइड के साथ आए लोगों के अनुभव

ये व्यक्तिगत अनुभव हैं। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं।

  • सात दिन में सबसे बड़ा अंतर यह आया कि सुबह उठते ही भारीपन नहीं रहता। खाने का समय बदला, और नींद अपने आप सुधर गई।
    सुनीता अग्रवाल५२ · श्री गंगानगरव्यक्तिगत अनुभव — परिणाम भिन्न हो सकते हैं
  • शिविर में प्रतिदिन शर्करा नापी जाती थी, इसलिए अंदाज़े की जगह आँकड़ा सामने था। लौटकर मैंने अपनी रिपोर्ट अपने डॉक्टर को दिखाई और आगे का निर्णय उन्हीं के साथ लिया।
    रमेश कुमार५८ · हनुमानगढ़व्यक्तिगत अनुभव — परिणाम भिन्न हो सकते हैं
  • बीस साल से जेब में गोली रखता था। रात का भोजन जल्दी करने भर से जो अंतर आया, उसकी मुझे कल्पना नहीं थी।
    महेन्द्र सिंगल४७ · बीकानेरव्यक्तिगत अनुभव — परिणाम भिन्न हो सकते हैं

शिविर कैलेंडर

आगामी शिविर

तिथि, नगर, स्थान और शेष स्थान — सब कुछ पहले से स्पष्ट। पोस्टर का इंतज़ार नहीं।

पूरा कैलेंडर देखें

आगामी शिविर

  • श्री गंगानगर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    स्थान भर रहे हैं१२ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    ४–११ अक्टूबर २०२६
    स्थान
    श्री माहेश्वरी भवन, श्री गंगानगर
    पंजीकरण करें
  • जयपुर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है९६ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    १–८ नवंबर २०२६
    स्थान
    सामुदायिक भवन, मालवीय नगर, जयपुर
    पंजीकरण करें
  • ऋषिकेश में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है४१ स्थान शेष

    आश्रम शिविर

    तिथि
    ६–१३ दिसंबर २०२६
    स्थान
    गंगा तट आश्रम, ऋषिकेश
    पंजीकरण करें
  • बीकानेर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है१०८ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    १०–१७ जनवरी २०२७
    स्थान
    अग्रसेन भवन, बीकानेर
    पंजीकरण करें

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