सत्संग
शरीर ही हमारा मंदिर है
परम आनन्द जी के एक सत्संग से — शरीर के प्रति दृष्टि बदलने पर आहार अपने आप बदल जाता है।
१२ जुलाई २०२६५ मिनट

दृष्टि पहले, नियम बाद में
नियमों की सूची किसी को नहीं बदलती। जब तक यह न दिखे कि यह शरीर उधार मिला है और लौटाना है, तब तक कोई सूची काम नहीं करती।
शिविर में सात दिन इसी दृष्टि के लिए हैं। नियम उसके बाद अपने आप सरल लगने लगते हैं।

