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रोग

मोटापा

Obesity

मोटापा अपने आप में रोग नहीं, बल्कि एक संकेत है — कि शरीर जितना ग्रहण कर रहा है उतना पचा नहीं पा रहा। शिविर भार घटाने का लक्ष्य नहीं रखता; वह पाचन को ठीक करने का लक्ष्य रखता है, और भार उसके पीछे-पीछे चलता है।

भार क्यों बढ़ता है

शिविर में मोटापे को गणित की तरह नहीं देखा जाता — कि कितनी कैलोरी अंदर गई और कितनी बाहर। देखा यह जाता है कि शरीर जो अंदर ले रहा है, उसका करता क्या है।

जब पाचन तंत्र पर लगातार बोझ रहता है — अनियमित समय पर भारी भोजन, दो भोजनों के बीच बिना अंतराल, रात्रि में देर से खाना — तो शरीर के पास पचाने का समय ही नहीं बचता। जो पचा नहीं, वह संचित होता है।

इसीलिए मोटापे के साथ प्रायः एसिडिटी, कब्ज़, थकान और नींद की गड़बड़ी भी चलती है। ये अलग-अलग रोग नहीं हैं। ये एक ही स्थिति के अलग-अलग चेहरे हैं।

सात दिन में क्या होता है

पहले दो दिन पाचन तंत्र को विश्राम दिया जाता है — रस आहार और हल्का सात्विक भोजन। तीसरा दिन उपवास का होता है। इसके बाद भोजन धीरे-धीरे लौटता है, पर एक निश्चित क्रम और समय के साथ।

भार में जो परिवर्तन सात दिन में दिखता है, उसका बड़ा भाग संचित जल और अपच का होता है। स्थायी परिवर्तन शिविर में नहीं, शिविर के बाद की दिनचर्या में बनता है — और यही शिविर का असली विषय है।

छठे दिन पुनः भार, बीपी और शर्करा की जाँच होती है, ताकि आप स्वयं अंतर देख सकें। सातवें दिन आप अपना व्यक्तिगत आहार चार्ट लेकर लौटते हैं।

शिविर के बाद

सात दिन एक शुरुआत है, अंत नहीं। जो लोग परिवर्तन बनाए रखते हैं, वे प्रायः तीन बातें निभाते हैं — भोजन का निश्चित समय, रात्रि में जल्दी और हल्का भोजन, और दो भोजनों के बीच पर्याप्त अंतराल।

यदि आप मोटापे के साथ डायबिटीज, बीपी या थायराइड की दवा ले रहे हैं, तो शिविर में आपकी दवा बंद नहीं की जाती। छठे दिन चिकित्सक परामर्श होता है, और आगे का निर्णय आपके अपने चिकित्सक के साथ लिया जाता है।

आहार के मूल नियम

  • भोजन का समय निश्चित — शरीर घड़ी से चलता है
  • दो भोजनों के बीच कम से कम चार घंटे का अंतराल
  • रात्रि का भोजन सूर्यास्त के निकट और हल्का
  • भोजन से पहले और बाद में तत्काल जल नहीं
  • ऋतु के अनुसार और स्थानीय रूप से उपलब्ध आहार
  • प्रत्येक सप्ताह एक दिन का विश्राम-उपवास

अनुभव

मोटापा के साथ आए लोगों के अनुभव

ये व्यक्तिगत अनुभव हैं। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं।

  • सात दिन में सबसे बड़ा अंतर यह आया कि सुबह उठते ही भारीपन नहीं रहता। खाने का समय बदला, और नींद अपने आप सुधर गई।
    सुनीता अग्रवाल५२ · श्री गंगानगरव्यक्तिगत अनुभव — परिणाम भिन्न हो सकते हैं

शिविर कैलेंडर

आगामी शिविर

तिथि, नगर, स्थान और शेष स्थान — सब कुछ पहले से स्पष्ट। पोस्टर का इंतज़ार नहीं।

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आगामी शिविर

  • श्री गंगानगर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    स्थान भर रहे हैं१२ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    ४–११ अक्टूबर २०२६
    स्थान
    श्री माहेश्वरी भवन, श्री गंगानगर
    पंजीकरण करें
  • जयपुर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है९६ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    १–८ नवंबर २०२६
    स्थान
    सामुदायिक भवन, मालवीय नगर, जयपुर
    पंजीकरण करें
  • ऋषिकेश में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है४१ स्थान शेष

    आश्रम शिविर

    तिथि
    ६–१३ दिसंबर २०२६
    स्थान
    गंगा तट आश्रम, ऋषिकेश
    पंजीकरण करें
  • बीकानेर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है१०८ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    १०–१७ जनवरी २०२७
    स्थान
    अग्रसेन भवन, बीकानेर
    पंजीकरण करें

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